Monday, 13 October 2014

अनेक सम्प्रदायों की सत्यता

 अनेक सम्प्रदायों की सत्यता 



इस दुनिया में आज इतने  धर्म प्रचलित हैं। क्या वास्तव में इतने सारे  धर्म सत्य हैं ? इनके विवरण और मान्यताये क्या सभी सही हैं ? सनातन धर्मावलम्बी विष्णु की उपासना करते हैं तो मुसलमान और ईसाई ईश्वर के निर्गुण-निराकार रूप अल्लाह या गॉड की उपासना करते हैं। इनमें से कौन सही है ? या तो इनमें से किसी एक का अस्तित्व है या किसी का नहीं है और या यह भी हो सकता है कि ये तीनों किसी एक ही चरित्र का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उपरोक्त तीन विकल्पों में से पहला और दूसरा तो गले नहीं उतर सकते क्योंकि यदि ईश्वर के किसी भी रूप का अस्तित्व नहीं है तो इस संसार को बनाया किसने है ?,यदि किसी एक का अस्तित्व है तो वो कौन है परन्तु इन सभी में कुछ ऐंसे चमत्कार विद्यमान हैं जिन्हे देखकर लगता है कि इनमें कुछ न कुछ सत्यता तो है यानि ये सारी मान्यताएं और उपासना पद्धतियाँ अपना अपना महत्त्व रखती हैं। अब तीसरा विकल्प ये बचता है कि ये तीनों एक ही चरित्र या शक्ति का प्रतिनिधित्व करती हैं। हाँ इस बात को माना जा सकता है क्योंकि एक विस्तृत चिंतन हमें उसी विकल्प पर लाकर छोड़ देता है।

किसी महापुरुष ने इस तत्थ्य की बड़ी सुन्दर विवेचना की है

एक गणित का शिक्षक विभिन्न विद्यार्थियों की समझने की क्षमता के अनुसार  उन्हें वभिन्न तरीकों से गणित पढ़ाता है उस शिक्षक के तरीके हर विद्यार्थी के लिए अलग होते है परन्तु वह हर विद्यार्थी को पढ़ाता गणित ही है ,

ठीक उसी प्रकार ईश्वर ने इस संसार में इतने सारे सम्प्रदायों का प्रादुर्भाव हो जाने दिया है।
सबकी जड़ में है एक ही बात है "ईश्वर या परमपुरुष के अतिरिक्त इस संसार में और कोई भी शाश्वत नहीं है।"
संसार का प्रत्येक धर्मग्रन्थ सिर्फ और सिर्फ ईश्वर की पूजन पर बल देता है।

गलती तो हमारी है कि हम धर्मग्रंथों को पढ़े बिना नाना प्रकार की भ्रांतियां पाल लेते हैं। 

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