आज #bigboss_ko_ban करने को लेकर समाज का एक बहुत बड़ा तबका विरोधरत है परन्तु सोचने वाली बात यह है कि इतने समय से वह जो कुछ भी दिखा रहा था क्या वह पहले भी सही था?
पैसा कमाने और लोगों की जीवन शैली में बदलाव लाकर अपनी तथाकथित उदार विचारधारा का प्रचार प्रसार करके अपने उत्पादों की मार्केट रीच बढ़ाने के लिए बॉलीवुड एक अचूक उपाय के रूप में उभरा है। जाने अनजाने में एक अपेक्षाकृत अपरिपक्व और कम जागरूक दर्शक उसके प्रभाव में आ जाता है। उसके जीवन में वहीं सिद्धांत एवम् विचार रच बस जाते हैं जो टीवी पर दिखाए जा रहे हैं। क्या आपने लोगों को किसी विशिष्ट फिल्म में दर्शाए का रहे संवाद, अभिनय, केश विन्यास(हेयर स्टाइल) या हाव भाव की नकल करके व्यवहार में उतारते नहीं देखा?
याद कीजिए एक पोर्न स्टार सनी लियोनी को भी बॉलीवुड में इसी शो के साथ लॉन्च किया गया था। फिर एक शॉर्ट फिल्म भी आयी थी जिसमे एक लड़की अपने माता पिता से कहती है कि वो सनी लियोन बनना चाहती है उसके माता पिता के साथ उसके संवाद को भी दिखाया गया है और दिखाया गया है कि उसके माता पिता उसके साथ वितंडा में हर जाते हैं उनके विचार उस लड़की के समक्ष तर्कहीन सिद्ध हो जाते हैं।
इसमें साफ साफ समझ में आता है कि पोर्न फिल्म्स के लिए भारत में मार्केट बनाने के लिए यह एक सक्रिय वैचारिक प्रयास था।
ये षड्यंत्र बहुत सोच समझकर चलाया जा रहा है बिग बॉस इसका मात्र एक अंश भर है। पैसा कमाने के लिए ये लोग सब करेंगे हमारी परंपरा और संस्कृति सबके साथ खिलवाड़ करेंगे।
सेंसर बोर्ड फिल्म पर कांट छांट करके प्रयास करता है कि इस सब को नियंत्रित किया का सके पर वह भी उतना सफल नहीं हो पाता।
सूचना तकनीक के विस्तार के साथ अब एक नया तरीका आ गया है वेब सीरीज जहां रोक लगा पाना भी इतना पेचीदा है कि हम भी सोच भी नहीं सकते। यहां कौन से विचारों का, कब, कौन, कैसे प्रचार प्रसार कर दे कोई गारेंटी नहीं है।
समाज की कर्णधार पीढ़ी जिसे भारतीय जीवन मूल्यों का ज्ञान नहीं है वह Bigboos और अन्य धारावाहिकों में दिखाए जा रहे पात्रों से प्रभावित होकर उन्हें रोल मॉडल बना लेती है। जरा सोचिए जब लोग इनसे प्रेरणा लेंगे तो आने वाले समय में भारतीय समाज की क्या दुर्दशा करेंगे। ऐसी स्थिति में जो लोग समझदार हैं ये उनका दायित्व बनता है कि टीवी पर दिखाए जा रहे कुसंस्कारी कृत्यों को भारतीय समाज के लोक प्रचलन में आने से रोकें एवं इसका एक ही उपाय है विरोध और अधिक से अधिक विरोध। ताकि कोई भी व्यक्ति और कोई भी कलाकार अपने क्षुद्र व्यवसायिक स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए भारतीय समाज की जड़ों के साथ खेलने का दुस्साहस न करे ऐसा करने से पूर्व वह बारंबार सोचे।
और अंत में उदाहरण के लिए.. हम बहुत अच्छे से जानते हैं कि भारत की पुरातन संयुक्त पारिवारिक व्यवस्था पर टीवी में लंबे समय से दिखाए जा रहे धारावाहिकों ने कितना दुष्प्रभाव डाला है।
संभवतः विषय को समझने के लिए यह उदाहरण पर्याप्त है।
भारत माता की जय
वन्दे मातरम्।
पैसा कमाने और लोगों की जीवन शैली में बदलाव लाकर अपनी तथाकथित उदार विचारधारा का प्रचार प्रसार करके अपने उत्पादों की मार्केट रीच बढ़ाने के लिए बॉलीवुड एक अचूक उपाय के रूप में उभरा है। जाने अनजाने में एक अपेक्षाकृत अपरिपक्व और कम जागरूक दर्शक उसके प्रभाव में आ जाता है। उसके जीवन में वहीं सिद्धांत एवम् विचार रच बस जाते हैं जो टीवी पर दिखाए जा रहे हैं। क्या आपने लोगों को किसी विशिष्ट फिल्म में दर्शाए का रहे संवाद, अभिनय, केश विन्यास(हेयर स्टाइल) या हाव भाव की नकल करके व्यवहार में उतारते नहीं देखा?
याद कीजिए एक पोर्न स्टार सनी लियोनी को भी बॉलीवुड में इसी शो के साथ लॉन्च किया गया था। फिर एक शॉर्ट फिल्म भी आयी थी जिसमे एक लड़की अपने माता पिता से कहती है कि वो सनी लियोन बनना चाहती है उसके माता पिता के साथ उसके संवाद को भी दिखाया गया है और दिखाया गया है कि उसके माता पिता उसके साथ वितंडा में हर जाते हैं उनके विचार उस लड़की के समक्ष तर्कहीन सिद्ध हो जाते हैं।
इसमें साफ साफ समझ में आता है कि पोर्न फिल्म्स के लिए भारत में मार्केट बनाने के लिए यह एक सक्रिय वैचारिक प्रयास था।
ये षड्यंत्र बहुत सोच समझकर चलाया जा रहा है बिग बॉस इसका मात्र एक अंश भर है। पैसा कमाने के लिए ये लोग सब करेंगे हमारी परंपरा और संस्कृति सबके साथ खिलवाड़ करेंगे।
सेंसर बोर्ड फिल्म पर कांट छांट करके प्रयास करता है कि इस सब को नियंत्रित किया का सके पर वह भी उतना सफल नहीं हो पाता।
सूचना तकनीक के विस्तार के साथ अब एक नया तरीका आ गया है वेब सीरीज जहां रोक लगा पाना भी इतना पेचीदा है कि हम भी सोच भी नहीं सकते। यहां कौन से विचारों का, कब, कौन, कैसे प्रचार प्रसार कर दे कोई गारेंटी नहीं है।
समाज की कर्णधार पीढ़ी जिसे भारतीय जीवन मूल्यों का ज्ञान नहीं है वह Bigboos और अन्य धारावाहिकों में दिखाए जा रहे पात्रों से प्रभावित होकर उन्हें रोल मॉडल बना लेती है। जरा सोचिए जब लोग इनसे प्रेरणा लेंगे तो आने वाले समय में भारतीय समाज की क्या दुर्दशा करेंगे। ऐसी स्थिति में जो लोग समझदार हैं ये उनका दायित्व बनता है कि टीवी पर दिखाए जा रहे कुसंस्कारी कृत्यों को भारतीय समाज के लोक प्रचलन में आने से रोकें एवं इसका एक ही उपाय है विरोध और अधिक से अधिक विरोध। ताकि कोई भी व्यक्ति और कोई भी कलाकार अपने क्षुद्र व्यवसायिक स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए भारतीय समाज की जड़ों के साथ खेलने का दुस्साहस न करे ऐसा करने से पूर्व वह बारंबार सोचे।
और अंत में उदाहरण के लिए.. हम बहुत अच्छे से जानते हैं कि भारत की पुरातन संयुक्त पारिवारिक व्यवस्था पर टीवी में लंबे समय से दिखाए जा रहे धारावाहिकों ने कितना दुष्प्रभाव डाला है।
संभवतः विषय को समझने के लिए यह उदाहरण पर्याप्त है।
भारत माता की जय
वन्दे मातरम्।